अजीबसा रहताहै मन का कोहरा
धूंधला धूंधलासा, खयाली नजारा
सोच, या कभीकभार कोई विचार
अनजाने में अंदर दौडता है अधूरा
आकरहीन बादलों का, जमावडा
चमक भरी बूंदों का, घना अंबारा
ओढकर नर्म सफेद दूधिया चादर
अपनेही आगोश में सोया किनारा
©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९

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