अजनबी मौसम
ठहरा हुआ मौसम कोई अजनबी जैसा
मानो क्षितिज चौखट पर शामको फसा
बादलों मे निले काले पानी का है बसेरा
घुमने टहलने उन्हें खुला आसमान सारा
बरसे या न बरसे?पडे बादल उलझन में
जडें जमाएं दरख़्त पुराना खडा चिंता में
कुछ भी ना समझे, असमंजस मन मेरा
अच्छा कहूं या बूरा ऐसा यहांपर नजारा
बदलापूर
Hindi Kavita, July 18, 2026 YQ 10:19:35 AM
©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
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