बातचीत
आज खुद में इतिहास समेटे
ऐसी कई इमारतें खामोश है !
याद कर स्वर्णिम अतीत को
परिंदों से बातचीत करती हैं !
ऐसाही हाल कुछ बुजुर्गों का
जमाने में आजकल होता है !
अकेलेपन के, बोझ के साथ
अंदर ही अंदर रोते रहता है !
©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९









