अजनबी मौसम
ठहरा हुआ मौसम कोई अजनबी जैसा
मानो क्षितिज चौखट पर शामको फसा
बादलों मे निले काले पानी का है बसेरा
घुमने टहलने उन्हें खुला आसमान सारा
बरसे या न बरसे?पडे बादल उलझन में
जडें जमाएं दरख़्त पुराना खडा चिंता में
कुछ भी ना समझे, असमंजस मन मेरा
अच्छा कहूं या बूरा ऐसा यहांपर नजारा
©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
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