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बुधवार, १४ जानेवारी, २०२६

हर्ष पर्व १४०१२०२६ yq ०९:४६:१५






















हर्ष पर्व 

मकर संक्रांति वो पर्व है
सभी भारतीयों को उसपर गर्व है
एक उत्सव अनेकों नाम
अनेकता में एकता ये शेष सर्व है

प्रकृति और परंपरा संग
हमारे देश का अनोखा आदर्श है
उमंग भरे इन त्योहारों से
हर कोई उठाता यहां नया हर्ष है


©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९

सोमवार, २९ डिसेंबर, २०२५

कोहरा २९१२२०२५ yq १७:४९:०७


कोहरा

अजीबसा रहताहै मन का कोहरा 
धूंधला धूंधलासा, खयाली नजारा

सोच, या कभीकभार कोई विचार 
अनजाने में अंदर दौडता है अधूरा

आकरहीन बादलों का, जमावडा
चमक भरी बूंदों का, घना अंबारा

ओढकर नर्म सफेद दूधिया चादर
अपनेही आगोश में सोया किनारा

©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९

शुक्रवार, १४ नोव्हेंबर, २०२५

ऐसा लगता हैं

ऐसा लगता हैं

दुनिया से कट गए हैं,अब ऐसा लगता हैं
किससे हुयी गलती,मन सोच में रहता हैं

कमजोर नहीं है रिश्ते शाखों से जानते हैं
शायद,इरादा पतझड का गलत लगता हैं

इतनी आसानी से यूं न हम टूटते जड़ों से
जानेसे हमारे किसी को सुकून मिलता हैं

बेवजह, हरकत कोई तो बडी की होगी?
हर एक झोंका, हवा का पेड से कहता हैं

चलो अच्छा हुआ,वक्त पर समझ आया
एक अच्छा काम,किसीको तो खलता हैं

https://marathikavita.co.in/index.php?topic=70767.new#new

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गुरुवार, १८ सप्टेंबर, २०२५

मतला शेर १७०९२०२५ ya १४:०५:३०

मतला शेर

ये दुनिया किसी की सगी तो नहीं है
बेवजह तारीफ कहीं ठगी तो नहीं है

पहचान से सिर्फ करीब वो इतने आयें
और पता चला हमारी सखी तो नहीं है

चोंटें लगती है अक्सर कडवी बातों से
फिर पुछते है दिल को लगी तो नहीं है

अचरज है खैरात देता लालची देखना 
असल में इतना बडा त्यागी तो नहीं है

©शिवाजी सांगळे 🦋papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९

रविवार, ३१ ऑगस्ट, २०२५

रात और मै

रात और मै

तनहाई को, गले से लगाया आज हमने
रात को आसुओं से सजाया आज हमने

बातें बहोतसी हुई दरमियान गमे दर्द की
जैसे मामला दिल का उठाया आज हमने

काफी देर तक, रोती रही रात लिपटकर
बडी मोहब्बत से,उसे मनाया आज हमने

फसाने कुछ और चलते हमारे सेहर तक
कहकर फिर मिलेंगे, सुलाया आज हमने

https://marathikavita.co.in/index.php?topic=63931.new#new

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सोमवार, २५ ऑगस्ट, २०२५

सिग्नल २५०८२०२५ १२:२५:०७

सिग्नल 🚸

एक प्रश्नचिन्ह लाल सिग्नल का
जबरन ठहरना पडता है 
ज़िन्दगी के  सवाल पर...

जगती है तभी यकायक 
आशा की गेरुई किरण, और
हम, तैयार होते हैं
सवरते है स्वयं को...

फिर शुरू होती है हरी दौड, 
रफ्तार में...अगले सिग्नल तक
अक्सर होतें है, एक पडाव
गंतव्य तक कि यात्रा मे...

और क्या लिखें?

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सोमवार, ७ एप्रिल, २०२५

काग़ज़ ०७०४२०२५ yq १५:११:०७

काग़ज़

लिखा हुआ होकर भी
कभीकभी चुप्पी साधे होता है

कोरा रहते हुए भी कभी
बहोत सारी बातें बयां करता है 

दुमडा हुआ रहता ठिक  
मसला हुआ बडा दर्द सहताहै

जन्म के साथ, मृत्यु के बाद
हर काग़ज़ अहमियत रखता है

उम्र के हर एक पडाव पर
काग़ज़, बहोत कुछ कहता है

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शुक्रवार, २८ मार्च, २०२५

एकमात्र सत्य २८०३२०२५ १२:११:०५


एकमात्र सत्य

न सुख है न दुख है चिता कि आग में
है परेशानीयां सारी,जीवन कि चिंता में

आखरी सच्चाई, नहीं मानता कोई यहां
दारोमदार है जीने का, चलती सास में

उम्रभर सारी होते रहेंगे किस्से, वाकये
जबाबदेही उनकी निभानी होगी राह में

भूलकर नहीं हटना सच्चाई के मार्ग से
सत्य बचेगा एकमात्र आखरी यात्रा में

©शिवाजी सांगळे 🦋papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९