गुरुवार, २४ सप्टेंबर, २०२६

बेचैन २४०९२०२६ yq २३:३८:३९






















बेचैन

इंतज़ार, बारिश और तुम
बूंद बूंद मे याद आते हो तुम!

हवा का झोंका, वो लहराती झड 
मानो, छूकर तन को जाते हो तुम!

हिचकोले लेता, इतराता छाता
जानबूझकर जैसे छेडते हो तुम!

चाहत भरा समा, सुहाना मौसम
इंतज़ार में बेचैन हम, कभी तुम!

©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९

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