बुधवार, २१ ऑक्टोबर, २०२६

अग्यान इशारे






















अग्यान इशारे

मन मष्तिष्क में बसीं हुई
बीते कल की खुशबू,
हर कोई याद करना चाहता है

अकेले में, कभी भीड़ में
कुछ अहसास उसके, 
जैसे हो, हमारा ध्यान खिंचते है

समय, एकमात्र गवाह
अपनी उधेड़बुन मे चलते
कभी खिंचकर, बुलाकर लेता है

मुरझाना, खिल उठना
कभी हमारे हाथों में था?
बस्, अग्यान इशारों पर चलते है

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©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९

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