सोमवार, २२ जून, २०२६

अकेले























अकेले

समय बदला, अब तनहा रहते है हम
मसरूफ़ तुम्हारे इश्क में थे कभी हम 

जमाना और तुम भी, जानते थे सच
इश्क पे परवान चढ़ाया करते थे हम

वक्त की आज के, पुछो ना हकीकत
तस्वीरों के सहारे कैसे बिताते हैं हम

बेजुबान दहलीज भी करतीहै सवाल
देखकर अकेले, क्या जबाब देगें हम

मसरूफ़ तुम्हारे इश्क में थे कभी हम
समय बदला,अब अकेले रहते है हम

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©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९

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