शुक्रवार, १७ एप्रिल, २०२६

कल्पना १७०४०२६ yq १४:२६:०६























कल्पना

मन का आईना
ढूंढता है मन को
परत दर परत

उदास फिर भी मन
दिखती नहीं उसे
खुद की असली सुरत

अक्सर यही होता है
एक कल्पना लेकर
खोजते है स्वयं को
लेकर अनगिनत सपने
जो कल्पना होती है
खुद के मन की

©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९

कोणत्याही टिप्पण्‍या नाहीत:

टिप्पणी पोस्ट करा