रविवार, १६ ऑगस्ट, २०२६

खामोश साथ १६०८२०२६ yq १०:४४:०९






















खामोश साथ

खामोशियों में साथ अजीब लगता हैं
गुमसुम दोनों,कोन किससे बोलता हैं

अर्से से चल रही कैसी है ये खामोशी
चुप्पी टूटने का एक बहाना चाहता हैं

साथ साथ तो है, खामोशियों में सही
मुंदकर आंखें कौन किसको देखता हैं

राह भले,टेढ़ी मेढ़ी इस सुनी सफ़र में
सहारे के लिए,हाथो में हाथ मांगता हैं

©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९

कोणत्याही टिप्पण्‍या नाहीत:

टिप्पणी पोस्ट करा