कठोर
है उम्र थोडी करों अच्छी बात
डूबें है, बडे बडे वक्त के साथ !
जो कुछ था यारों अपने पास
बाँट दिया सब कुछ हाथोंहाथ !
उजालेंं भरी, चमकतीं किरणें
खुशियां कहीं बगैर मुलाकात !
जानता हूँ तडपना, अंधेरों का
नहीं बैठता कोई, उनके साथ !
खैर, पास आएं कोई गलतीसे
छुडा लेती है दामन,हल्के रात !
ठहरता नहीं, पहिया समय का
कैसे हो,कठोर मन में जज्बात?
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©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९














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