रविवार, ३० नोव्हेंबर, २०२५

कठोर

कठोर 

है उम्र थोडी करों अच्छी बात
डूबें है, बडे बडे वक्त के साथ !

जो कुछ था यारों अपने पास
बाँट दिया सब कुछ हाथोंहाथ !

उजालेंं भरी, चमकतीं किरणें
खुशियां कहीं बगैर मुलाकात !

जानता हूँ तडपना, अंधेरों का 
नहीं बैठता कोई, उनके साथ !

खैर, पास आएं कोई गलतीसे 
छुडा लेती है दामन,हल्के रात !

ठहरता नहीं, पहिया समय का 
कैसे हो,कठोर मन में जज्बात?

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©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९

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